Wednesday, July 8, 2020

क्या है तेरे मन के अंदर

क्या है तेरे मन के अंदर
खोल के देख अपना बचपन
किस रास में तू रसा है
जो तेरे भीतर कुछ मरा है
जाने दे जो जाता है
खुद को क्यों मनाता है
वक़्त का पीछा क्यों करता है
जो जा चुका है
उसके पीछे क्यों पड़ा है
मन को जो तू मारे है
और कहां कुछ हाथ आवे है
देख तेरे मन के भीतर
कितना है तेरे बस के अंदर
तू कहां जान पाया है
अभी तुझको तुझसे कहां मिलवाया है
अभी तेरा सब बाकी है
ये वक़्त कहां कितना आगे है
अब भी तूही आगे है
सोच जरा जगा जरा
मन के भीतर झांक जरा
अब भी बहुत कुछ बाकी है
वक़्त अब भी तेरा साथी है
पर फिर भी ना जान सके मन
निराश ना हो अब है तेरा अंत्म चरण
जान की बाजी लगा
और देख सब के अंदर
पहचान है तू किसमें
था क्या तू जिसमें