मां माफ करना।
इतना बेसहारा बन बैठा हूं मैं
तुझे यू छलली होते देख राह हूं।
कैसे दिखाऊं मां
कितना प्यार है तुझसे
कितना दर्द है
मां ...
मां कैसे है ये लोग
क्यों हैं
क्यों नहीं सांस लेने देते
ये कौन सी मांग,
मांग रहे है
मुझमें इतना क्यों नहीं
के उखाड़ फेंकुं
जो भी तुझ तक आए।
मां...
बस अब सहा नहीं जा रहा
यूं जीना क्या जीना
जब तुझे यू टूटते देखूं।
तुझे रोते - बिखरते देखूं
इतना साहस मुझमें नहीं
मां...
मां क्या याद करू क्या नहीं
देश के वो दो टुकड़े
जो 1947 में हुआ
जहां हिन्दुस्तान पाकिस्तान बनाने में
ना जाने कितने सिख और मुस्लिम भाई ने
खून की नदियां देखी
क्या तब शांति की आवश्यकता नहीं थी
मां
क्या भूल जाए 1971 की जंग को
या भूल जाए इमरजेंसी को
महीनों भर की जंग ने
कितनी जान ली
कितनी मांओं के जिगर के टुकड़े को
टुकड़े टुकड़े कर दिए।
मां
मां 1990,
जब कश्मीरी पंडितों पे अत्याचार हुआ
पत्नियों और बेटियों को
सड़क पे ला बलात्कार किया गया
पंडितो को उनके घर में घुस
मौत के घाट उतारा गया
बच्चों की वो चिंख़ को
कैसे भूले,
जो अपनी मां के खून से
लथ पथ, आग से घिरा हुआ था
मां
कैसे भूले उन चार हैवानों को
जो 26/11 को तुझ तक पहुंच
मुंबई के चिथड़े चिथड़े उड़ा रहा था
ना जानें कौन सा मजहब था
हमारे मुस्लिम भाई यू नहीं
अल्लाह ने कब किसकी शहादत मांगी
मां
ये यू नहीं रुकेगा
कुछ तो करना पड़ेगा मां
यू इज्जत पर हाथ लगाने वाले को
सजा जरूर मिलनी चाहिए
ये बच्चे बच्चे नहीं है
मां
कसम लेते है हम सब तेरे लाल
खून का आखरी कतरा भी रहें
लड़ेंगे, उनका सर्वनाश करेंगे।
भारत माता की
जय
वन्दे मातरम्
जय हिंद।
प्रशांत सौरभ
I think that if you have not guts to speak then one thing is always be there i.e writting. most of the times i though the situation could be happened in another way in which i could make myself bigger, special, or unique, but all just a dream, i love to write, so i am here to express INSIDES ME. Follow me for magical speech, dreams and real thoughts
Friday, March 15, 2019
भारत माता
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